Written on the spot • Raipur Edition #41

आम सी कहानी

Harsh
Harsh
@nonymous • Raipur member
एक सवेरे बैठे हुए एक इच्छा हुई कि आज एक आम खाया जाए। घरवाली से कहा कि एक आम ले कर आता हूँ। सोचा कि पेड़ से तोड़ लेता हूँ जैसे बचपन में तोड़ा करता था। बाहर गया तो लम्बे सुडौल पेड़ थे पर उनमें से कोई आम का नहीं था। दूर चला, एक आम का पेड़ मिला पर उस पेड़ पर कोई आम नहीं था। तो सोचा एक आम खरीद लाता हूँ, यह सोच कर पास के बाज़ार गया। पता चला अब मंडी नहीं थी, पर मॉल के बाज़ार में मिलता था आम। फिर मोड़ कर अपने कदम, चले हम मॉल की ओर। यहाँ पर दुकानें तो थीं पर आम के सिवा सब कुछ दिख रहा था। अति अलौकिक, मन को भाने वाला इसका रूप था। यहाँ लोगों के साथ सीढ़ियाँ भी खुद चलती थीं। जब दुकानदार से पूछा आम है क्या, तो उसने आम का जूस दिखा दिया। इस जूस को तो हमने विज्ञापन में एक अभिनेत्री के हाथों में देखा था। मनमोहित हो कर खरीदने का फैसला किया। फिर यात्रा में आगे बढ़े तो एक व्यक्ति ने मॉल के बीच आम के अचार का ठेला लगाया हुआ था। वह बोलने लगा कि गाँव की याद आ जाएगी, इस आम के अचार को खाकर। गाँव सुनते ही बीते वक़्त की याद आ गई जब माँ दो रोटी के साथ आम का अचार दिया करती थी। इस भाव में खो कर एक अचार की डिब्बी खरीद ली। यह अचार तो था लेकिन यह कुछ अलग था, क्योंकि शायद यह बरनी में न था। आगे जाते ही दूर से देखा कि एक दुकान में एक फ्रिज में एक डब्बा था जिसके ऊपर एक आम की तस्वीर बनी थी। पास जा कर देखा तो सरदार जी ने बताया कि वह मैंगो लस्सी थी, जो काफी स्वादिष्ट थी। लस्सी तो काफी मज़ेदार लगती थी और उसमें आम मिला हो तो पता नहीं क्या ही मज़ा आएगा। इस नवीन अनुभव को करने की चाह सी आ गई, उस चाह में इस मैंगो लस्सी को भी खरीद लिया। सरदार जी ने बताया कि वे आम के पापड़ भी बनाते थे, एक पैकेट खरीदने पर एक और साथ मुफ्त में देंगे। मैंने सोचा कि यह ऐसा अनुभव इस सौदे के साथ शायद फिर न मिले। तो साथ ही दो पैकेट आम पापड़ के भी खरीद डाले। आगे बढ़ते ही एक टॉफी की दुकान पर भाईसाहब ने एक आम की जेली और टॉफी चखने को दी। मना करने के बावजूद उन्होंने आज़माने पर मजबूर कर दिया। खा कर देखा तो काफी मीठी थी वह, पर बात हुई कि घर में कोई बच्चे ही नहीं थे किसके लिए खरीदूँ। तो उन्होंने सुझाव दिया कि तोहफे के लिए बहुत मशहूर थे ये दो सामान। फिर यह तोहफा भी खरीद ही लिया पर यह पता नहीं था कि यह देना किसको था। मॉल में घूमते-घूमते काफी थकान हो गई थी तो विचार किया कि घर की ओर प्रस्थान किया जाए और आम किसी दिन और खाया जाए। घर की ओर जाने के लिए एक ऑटो-रिक्शा किया, ऑटो वाले ने सामान सहित मोहल्ले में छोड़ दिया। मोहल्ले के रास्ते में एक आम का ठेला दिखा पर अब इस ठेले तक जाने की आस कुछ मर सी गई थी। सामान ले कर घर पहुँचे तो घरवाली ने पूछा आप तो एक आम लेने गए थे ना। मेरे जवाब में चुप्पी थी पर मैंने फिर मुस्कुरा कर शीश झुका दिया।
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